Saturday, 9 May 2020

टूट कर जब पात पेड़ों से धरा पर आ गिरे, प्रकृति के इस मौन क्रंदन पर बता मन में क्या लिखूं , चंद रोटी के लिए नाचता संसार है, मौत की इस महामारी में बता मन में क्या लिखूं, कौन जाने किस घड़ी में आ गया यह कालकूट, जो जहां था वहीं ठहरा देखकर मृत्यु का रूप, महा तांडव पर बता मन मैं क्या लिखूं ,देखकर विचलित हुआ मन कोरोना के काल को अब बता मन में क्या लिखूं

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