जय गणेश गणनाथ दयानिधि सकल विघ्न कर दूर हमारे।टेक। प्रथम धरे जो ध्यान तुम्हारो तिसके पूरण कारज सारे।१।जय.० लंबोदर गज बदन मनोहर कर त्रिशूल परशू वर धारे।२।जय ० ब्रह्मादिक सुर घ्यावत मनमें, ऋषि मुनि गण सब दास तुम्हारे ।४।जय० ब्रह्मानंद सहाय करो नित भक्ती जनों के तुम रखवारे ।५।जय०
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